दीपक अधिकारी
हल्द्वानी
नई दिल्ली : सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और बार-बार लापरवाही करने वाले चालकों पर सख्ती करने के लिए केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। बुधवार को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नए संशोधन के तहत यह प्रावधान जोड़ा है कि यदि कोई चालक एक वर्ष के भीतर पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित या पूरी तरह रद्द किया जा सकता है मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह नया नियम 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में लागू होगा। लाइसेंस निलंबन या रद्द करने का अधिकार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) या जिला परिवहन अधिकारी के पास रहेगा। हालांकि, किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित चालक को अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य होगा। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि हर कैलेंडर वर्ष में उल्लंघनों की गिनती नए सिरे से की जाएगी और पिछले वर्ष के मामलों को अगले वर्ष में नहीं जोड़ा जाएगा।अब तक मोटर वाहन नियमों के तहत केवल 24 गंभीर अपराधों—जैसे वाहन चोरी, अपहरण, अत्यधिक तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग या खतरनाक ड्राइविंग—की स्थिति में ही लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान था। लेकिन नए नियमों के तहत अब हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, रेड लाइट जंप करना, गलत लेन में वाहन चलाना जैसे सामान्य लेकिन खतरनाक उल्लंघन भी यदि एक साल में पांच बार किए जाते हैं, तो चालक के लिए भारी पड़ सकते हैं।अधिसूचना में चालान की प्रक्रिया को भी विस्तार से स्पष्ट किया गया है। ट्रैफिक पुलिस के वर्दीधारी कर्मी या अधिकृत अधिकारी मौके पर चालान काट सकेंगे। इसके अलावा, सीसीटीवी कैमरों और अन्य निगरानी उपकरणों के माध्यम से ऑटो-जेनरेटेड ई-चालान भी वाहन मालिकों को भेजे जाएंगे। चालक को 45 दिनों के भीतर चालान का भुगतान करना होगा या फिर अदालत में इसे चुनौती देनी होगी। यदि निर्धारित समय में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह माना जाएगा कि चालक ने उल्लंघन स्वीकार कर लिया है।इस नए नियम को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस भी शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और आदतन नियम तोड़ने वालों में डर पैदा होगा। वहीं, कुछ लोग इसे अत्यधिक सख्त और दमनकारी कदम बता रहे हैं पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने इस फैसले को सड़क सुरक्षा की दिशा में सही कदम बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सीसीटीवी कैमरों के जरिए जारी होने वाले ई-चालान कई बार विवादों में आ जाते हैं, इसलिए सरकार को इसके लिए एक पारदर्शी, स्पष्ट और मजबूत मानक प्रक्रिया तय करनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो।



