2027 चुनाव से पहले उत्तराखंड में दल-बदल रामशरण नौटियाल ने फिर मारी पलटी

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी 

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल की राजनीति तेज होने लगी है। नेता अपनी सहूलियत के हिसाब से पलटी मारना शुरू कर दिए हैं। इसी बीच गायक जुबिन नौटियाल के पिता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य भी मौजूद रहे।कांग्रेस ने रामशरण नौटियाल की वापसी को घर वापसी बताया है। उनके पार्टी में शामिल होने से चुनाव से पहले उत्तराखंड की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है। खासकर देहरादून जिले के चकराता, विकासनगर और सहसपुर विधानसभा क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

कांग्रेस से भाजपा और अब फिर कांग्रेस

रामशरण नौटियाल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वह कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहे और प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। वर्ष 2014 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें चकराता सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह कांग्रेस के प्रीतम सिंह को हराने में सफल नहीं हो सके और दूसरे स्थान पर रहे।हाल के दिनों में रामशरण नौटियाल ने भाजपा से इस्तीफा देने की जानकारी सार्वजनिक की थी। इसके बाद से ही उनके कांग्रेस में लौटने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।

रामशरण नौटियाल के अगले विधानसभा चुनाव में विकासनगर या सहसपुर सीट से मैदान में उतरने की चर्चाएं हैं।

चकराता सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह का मजबूत राजनीतिक आधार है। ऐसे में रामशरण नौटियाल की वापसी से जौनसार-बावर की राजनीति में भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में लौटे रामशरण नौटियाल अब 2027 के चुनाव में क्या भूमिका निभाएंगे, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी उत्तराखंड में चुनाव से पहले रामशरण नौटियाल की वापसी कांग्रेस के लिए कितनी फायदेमंद होगी और भाजपा को इसका कितना नुकसान होगा, इसका जवाब आने वाले चुनावी नतीजों में मिल ही जाएगा। तब तक वेट एन्ड वाच

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