दीपक अधिकारी
हल्द्वानी
ऋषिकेश। योग, साधना और मोक्ष की धरती ऋषिकेश में एक ऐसा काला सच सामने आया है, जिसने लोगों की रूह तक को झकझोर दिया है। तीर्थनगरी में सर्दी से राहत देने वाले रजाई-गद्दे दरअसल मृतकों के उपयोग में आ चुके बिस्तरों की रुई से तैयार किए जा रहे थे। यह खुलासा होते ही शहर में आक्रोश फैल गया और आस्था को ठेस पहुंचाने वाले इस गोरखधंधे पर पुलिस ने बड़ा प्रहार किया है।
मौत के बाद भी नहीं छोड़ा पीछा
सनातन परंपरा में जिस बिस्तर को मृत्यु के बाद अपवित्र मानकर घर से बाहर कर दिया जाता है, वही बिस्तर कुछ लोग पैसे की लालच में इकट्ठा कर रहे थे। कबाड़ समझकर फेंके गए इन रजाई-गद्दों से रुई निकाली जाती, फिर उसे नई रुई में मिलाकर नए बिस्तरों का रूप देकर बाजार में बेचा जाता था।
एक शिकायत और खुल गई परतें
दांडी, रानीपोखरी निवासी अमित सिंह की एक शिकायत ने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। रानीपोखरी थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रानीपोखरी चौक स्थित एक दुकान पर छापा मारा, जहां यह शर्मनाक कारोबार चलता मिला।
तीन चेहरे, एक घिनौना कारोबार
पुलिस ने सलमान, हामिद और संजय को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया कि संजय मृतकों के पुराने रजाई-गद्दे इकट्ठा करता था, जबकि सलमान और हामिद उनकी रुई निकालकर उसे नई रुई में मिलाते थे। इसके बाद वही रजाई-गद्दे बाजार में सर्दी से जूझ रहे लोगों को बेचे जाते थे।
ठंड बनी कमाई का हथियार
इन दिनों उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ऋषिकेश, जो गढ़वाल का प्रमुख बाजार और पहाड़ों का प्रवेश द्वार है, वहां से पहाड़ी जिलों तक रजाई-गद्दों की सप्लाई होती है। आरोपियों ने इसी मजबूरी और बढ़ती मांग का फायदा उठाकर आस्था और इंसानियत दोनों को शर्मसार कर दिया।
आस्था पर चोट, लोगों में गुस्सा
मामले के सामने आते ही स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यह केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि धार्मिक मान्यताओं और मानवीय संवेदनाओं पर सीधा हमला है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी गई है।



