दीपक अधिकारी
हल्द्वानी
देहरादून – राज्य कर विभाग में तैनात उपनलकर्मियों के नियमितीकरण और सेवा संबंधी लाभों के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका (एसएलपी) दायर करेगी। इसके लिए शासन ने राज्य कर विभाग को तत्काल प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।जानकारी के अनुसार विभाग से जुड़ी 37 रिट याचिकाओं में कुल 116 डेटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं। इनमें से 105 कर्मियों ने नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, कृत्रिम व्यवधान समाप्त करने, 10 वर्ष से अधिक सेवा के आधार पर एरियर तथा सेवा से बाहर रहने की अवधि का वेतन देने की मांग की थी।
शासन स्तर पर हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में 96 कर्मियों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। सबसे अधिक विवाद श्रेणी-3 के उन 72 कर्मियों को लेकर सामने आया, जिनकी सेवा में समय-समय पर कृत्रिम व्यवधान दर्ज किए गए हैं।बैठक में स्पष्ट किया गया कि सैनिक कल्याण विभाग के शासनादेश के अनुसार केवल उन्हीं उपनल कर्मियों को चरणबद्ध लाभ दिया जा सकता है, जो 12 नवंबर 2018 की कट-ऑफ तिथि तक बिना किसी सेवा व्यवधान के लगातार कार्यरत रहे हों। ऐसे में 72 कर्मियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना विभागीय नीति और नियमों के विपरीत माना गया।अधिकारियों ने आशंका जताई कि यदि इन कर्मचारियों को राहत दी गई तो अन्य विभागों से भी इसी तरह की मांगें उठ सकती हैं, जिससे सरकार पर अतिरिक्त प्रशासनिक और वित्तीय बोझ बढ़ेगा। इसी को देखते हुए सरकार ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है।



