देवभूमि उत्तराखंड में गणपति विसर्जन की प्रथा बंद करने की मांग, पहाड़ी आर्मी ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

हल्द्वानी। देवभूमि उत्तराखंड में गणपति महोत्सव के दौरान भगवान श्रीगणेश की मूर्तियों के विसर्जन की प्रथा को तत्काल बंद किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत के नेतृत्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी AP बाजपेयी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। संगठन ने सरकार और प्रशासन से उत्तराखंड की स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए गणपति विसर्जन की प्रथा पर तत्काल रोक लगाने की मांग की ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखंड को देवभूमि के रूप में विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान प्राप्त है। संगठन का दावा है कि विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, पुराणों और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं में उत्तराखंड को भगवान शिव की भूमि, माता पार्वती का मायका तथा श्रीगणेश जी से जुड़ी पवित्र भूमि के रूप में वर्णित किया गया है। ऐसे में देवभूमि में गणपति महोत्सव के दौरान श्रीगणेश जी की प्रतिमा को नदी, नालों अथवा जलस्रोतों में विसर्जित करने की प्रथा उत्तराखंड की स्थानीय आस्था और परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

‘देवभूमि में आह्वान और स्थापना की परंपरा, विसर्जन की नहीं’

पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में देवी-देवताओं का आह्वान कर उन्हें स्थापित करने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि संगठन के अनुसार उत्तराखंड की मूल लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में देवी-देवताओं को नदी-नालों में विसर्जित करने की परंपरा नहीं रही है हरीश रावत ने कहा कि गणपति महोत्सव के दौरान दूसरे क्षेत्रों से चली आ रही विसर्जन की परंपरा को उत्तराखंड की स्थानीय धार्मिक परंपराओं पर थोपना उचित नहीं है। उनका कहना है कि श्रीगणेश जी की मूर्तियों को जलस्रोतों में विसर्जित किए जाने से पहाड़ की सांस्कृतिक आस्था और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है उन्होंने इसे केवल धार्मिक परंपरा का विषय न बताते हुए उत्तराखंड की पर्वतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपराओं के संरक्षण से जुड़ा विषय बताया।

‘धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर स्थानीय संस्कृति से छेड़छाड़ स्वीकार नहीं’

हरीश रावत ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन किसी भी धार्मिक आयोजन के दौरान ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए जिनसे किसी क्षेत्र की स्थानीय संस्कृति, धार्मिक भावनाओं अथवा परंपराओं को ठेस पहुंचे उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अपनी विशिष्ट लोक संस्कृति, देवी-देवताओं की परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं हैं। इसलिए प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया जाना चाहिए उन्होंने सरकार से मांग की कि गणपति महोत्सव के आयोजकों और संबंधित संस्थाओं को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि उत्तराखंड के नदी-नालों और अन्य जलस्रोतों में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन न किया जाए।

‘प्रशासन की चेतावनी के बावजूद विसर्जन हुआ तो होगी रिकॉर्डिंग’

पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक आस्था के नाम पर प्रदेश में कई ऐसे आयोजन और गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, जिनसे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शासन-प्रशासन के संज्ञान में मामला लाए जाने और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी होने के बाद भी गणपति की मूर्तियों को नदी-नालों में विसर्जित किया जाता है, तो संगठन ऐसे मामलों की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग करेगा उन्होंने कहा कि यदि किसी आयोजन से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं या कानून का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित आयोजकों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की लागू धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की जाएगी।

*सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग*

ज्ञापन के माध्यम से पहाड़ी आर्मी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि उत्तराखंड में गणपति महोत्सव के आयोजन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। संगठन ने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रदेश की पारंपरिक संस्कृति, पर्यावरण और जलस्रोतों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

संगठन ने सरकार से यह भी मांग की कि उत्तराखंड की स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं पर विशेषज्ञों, धर्माचार्यों, विद्वानों और स्थानीय समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा कर आवश्यक निर्णय लिया जाए।

ये लोग रहे मौजूद

ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान जिला अध्यक्ष फौजी राजेंद्र कांडपाल, महिला जिला अध्यक्ष श्रीमती प्रेमा मेर, नगर अध्यक्ष कविता जीना, श्री श्री हेमगिरि महाराज, हरेंद्र राणा, युवा अध्यक्ष देवेंद्र सालाकोटी, जिला प्रभारी हिमांशु शर्मा, महेश भट्ट, मोहन बोरा, अंजू पांडे, दीपा पांडे, दीपिका मंगोली, मनोज रावत, सुनीता कोटिया, जयपाल रावत, विनोद बिष्ट, दीपा बोरा, भुवन पांडे, रमेश रावत, प्रदीप रौतेला, चंदन सिंह सहित दर्जनों कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।

Advertisement
Advertisement