आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल पर

दीपक अधिकारी

 

हल्द्वानी 

 

IDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन

2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्प

स्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानी

दिनांक: 2 नवंबर 2026

आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।

आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन

इस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?

वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?

जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?

IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?

निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न है

निजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।

संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

यूनियन की पांच प्रमुख मांगें

1. भारत सरकार एवं LIC द्वारा IDBI Bank की M/s 10955230 Canada Inc. (Fairfax Financial Holding Ltd. की Parent Entity) को प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकी जाए।

2. संसद में दिए गए आश्वासनों का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार IDBI Bank में न्यूनतम 51% हिस्सेदारी बनाए रखे।

3. IDBI Bank में केंद्र सरकार की 51% या उससे अधिक हिस्सेदारी के साथ जमाकर्ताओं को Sovereign Guarantee प्रदान की जाए।

4. मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों, कल्याणकारी सुविधाओं, पेंशन एवं सरकारी आरक्षण नीतियों की लिखित गारंटी दी जाए।

5. IDBI Bank में कार्यरत सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्तियों के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र की रक्षा की जाए।

देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर 2 एवं 3 नवंबर 2026 को देशभर में दो दिवसीय भूख हड़ताल आयोजित की जा रही है। हल्द्वानी सहित देश के विभिन्न केंद्रों पर अधिकारी एवं कर्मचारी इस आंदोलन में भाग लेकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों की नौकरी और सेवा शर्तों की रक्षा का संघर्ष नहीं है, बल्कि संसदीय जवाबदेही, सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था, सामाजिक न्याय और भारत की आर्थिक संप्रभुता की रक्षा का संघर्ष है हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि IDBI Bank के निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाकर संसद, कर्मचारियों और देश की जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

हमारा संकल्प

 IDBI बचाओ – सार्वजनिक बैंकिंग बचाओ।

 संसदीय आश्वासन का सम्मान करो।

 कर्मचारियों के अधिकार और सामाजिक न्याय की रक्षा करो।

 राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता की रक्षा करो।

जारीकर्ता:

United Forum of IDBI Officers & Employees, हल्द्वानी

 

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