दीपक अधिकारी
हल्द्वानी
चंपावत जिले के लोहाघाट में सोमवार को एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। लोहाघाट डिपो की रोडवेज बस जैसे ही बस अड्डे से काशीपुर के लिए रवाना हुई, महज 10 मीटर चलने के बाद उसके ब्रेक अचानक फेल हो गए। बस में सवारियां पूरी तरह भरी हुई थीं, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चालक नंदन सिंह फर्त्याल ने सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। उन्होंने बस को अनियंत्रित होकर राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर जाने से रोकने के लिए बस अड्डा परिसर की रेलिंग तोड़ते हुए सामने दीवार से टकरा दिया। गनीमत रही कि उस समय व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोई वाहन या राहगीर मौजूद नहीं था, अन्यथा हादसा जानलेवा हो सकता था।चालक ने बताया कि बस की वर्कशॉप में जांच करवाई गई थी, लेकिन जैसे ही बस स्टार्ट कर आगे बढ़ी, प्रेशर लीक हो गया और ब्रेक फेल हो गए। हादसे के बाद बस तिरछी होकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड़ी हो गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा। पुलिस कर्मियों ने बस अड्डे के अंदर से वैकल्पिक मार्ग बनाकर वाहनों का संचालन किसी तरह सुचारू कराया। सभी यात्रियों को सुरक्षित दूसरी बस से उनके गंतव्य की ओर रवाना किया गया घटना को लेकर क्षेत्रीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि लोहाघाट डिपो को तत्काल 15 से 20 नई बसों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान सरकार द्वारा केवल दो नई बसें ही उपलब्ध कराई गई हैं। डिपो के 33 बसों के बेड़े में से 11 बसें अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुकी हैं, इसके बावजूद उन्हें सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है, जो यात्रियों की जान से खुला खिलवाड़ है लोगों ने यह भी याद दिलाया कि कुछ दिन पहले लोहाघाट से देहरादून जा रही एक रोडवेज बस में देहरादून पहुंचने पर आग लग गई थी, जिसमें चालक-परिचालक और यात्रियों ने कूदकर जान बचाई थी। इसके अलावा, घटिया स्पेयर पार्ट्स लगाए जाने की शिकायतें भी कई बार चालक-परिचालकों द्वारा की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई क्षेत्रीय जनता ने सरकार और रोडवेज प्रबंधन से लोहाघाट डिपो को नई और सुरक्षित बसें उपलब्ध कराने तथा यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि भगवान की कृपा से इस बार बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो भविष्य में गंभीर दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।



