दीपक अधिकारी
हल्द्वानी
हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण प्रकरण की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई जारी है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकान्त ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक भूमि पर अनाधिकृत तरीके से कब्जा करना मालिकाना हक साबित नहीं करता। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि कोविड के दौरान इस मामले में एकपक्षीय आदेश जारी हुए थे, जिसके खिलाफ अपील दाखिल की गई थी। भूषण ने बताया कि तब सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत आदेश जारी किया था, जिसमें यह तय किया गया कि आगे क्या कार्रवाई होगी।सीजेआई ने सरकारी वकील ऐश्वर्य भाटी से पूछा कि पीएम आवास योजना के तहत सभी परिवारों को आवास उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण तो नहीं है। भाटी ने जवाब दिया कि रेलवे के पास सीमित जमीन है और बड़े पैमाने पर अनाधिकृत कब्जा होने के कारण विस्तार कार्य भी प्रभावित हो रहा है। सीजेआई ने कहा कि इस मामले में कोई अन्य वैकल्पिक प्रस्ताव नहीं है और अदालत का फोकस रेलवे भूमि पर कानूनन अधिकार सुनिश्चित करने पर है। सुनवाई के बाद स्पष्ट किया गया कि रेलवे भूमि पर अनाधिकृत कब्जा और विस्तार योजनाओं को संतुलित करना प्राथमिकता में रहेगा।


