उत्तराखंड में कक्षा 9 की छात्राओं के लिए गणित अनिवार्य, गृह विज्ञान का विकल्प समाप्त

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

देहरादून। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत उत्तराखंड राज्य के सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 की छात्राओं के लिए गणित को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया गया है। शिक्षा निदेशालय में आयोजित बैठक में राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। अब तक छात्राओं के पास गृह विज्ञान और गणित में से किसी एक विषय को चुनने का विकल्प था, लेकिन इस नए बदलाव के साथ यह विकल्प समाप्त कर दिया गया है शिक्षा महानिदेशक झरना कमठान ने बताया कि एनईपी 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य पाठ्यक्रम में यह बदलाव किया जा रहा है। सीबीएसई बोर्ड में भी इसी तरह की व्यवस्था पहले से लागू है। कक्षा 9 से छात्राओं को भेज “सामान्य गणित” और “स्टैंडर्ड गणित” के बीच चयन करने का अवसर मिलेगा। “सामान्य गणित” उन छात्राओं के लिए होगी, जो हाईस्कूल के बाद जीव विज्ञान या अन्य विषयों की पढ़ाई करना चाहती हैं, जबकि “स्टैंडर्ड गणित” चुनने वाली छात्राएं इंटरमीडिएट में गणित की पढ़ाई जारी रख सकेंगी।शिक्षा में समानता लाने की पहल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम को एनसीएफ (नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क) के अनुरूप बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य सभी छात्रों के लिए एक समान और समग्र शिक्षा प्रदान करना है। नई नीति के तहत छात्राओं की गणितीय और तार्किक क्षमताओं को विकसित करना भी प्राथमिकता है।छात्राओं और अभिभावकों की प्रतिक्रियाएं इस बदलाव पर छात्राओं और अभिभावकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत किया है उनका कहना है कि गणित अनिवार्य होने से छात्राओं के करियर के अधिक विकल्प खुलेंगे वहीं कुछ छात्राएं गृह विज्ञान के विकल्प के समाप्त होने से निराश भी हैं नई शिक्षा नीति के तहत अन्य बदलाव भी संभव शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, एनईपी 2020 के तहत भविष्य में और भी कई बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि छात्रों की बौद्धिक और शैक्षणिक क्षमताओं को मजबूत किया जा सके। राज्य के सरकारी स्कूलों में यह नई व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू की जाएगी।यह बदलाव राज्य की शिक्षा प्रणाली को सीबीएसई के अनुरूप बनाने और छात्रों को भविष्य के लिए बेहतर तैयार करने के उद्देश्य से किया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि गणित की अनिवार्यता से छात्राओं के करियर विकल्प व्यापक होंगे और वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और गणित (STEM) जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगी।

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