दीपक अधिकारी
हल्द्वानी
रेशम इतिहास में पहली बार महिलाओं की सहायता समूह के माध्यम से रेशम के कोये से हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर बाजारों में उतारा है। उत्तराखंड के रेशम से बने प्रोडक्ट की बाजार में काफी है। रेशम विभाग द्वारा नवरात्रि के मौके पर सहायता समूह के द्वारा तैयार किए गए उत्पादन को लॉन्च किया गया है। उपनिदेशक रेशम विभाग कुमाऊं हेमचंद्र ने बताया कि रेशम विभाग अभी तक किसानों को रेशम कीट पालन के माध्यम से उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का काम कर रहा है लेकिन पहली बार रेशम कीट पालन से तैयार हुए कोये से हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाए जाने का प्रयास किया गया है स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलांओं ने रेशम के कोये से देवी देवताओं के आकृतियां के अलावा सजावटी समान,पियोर रेशम से बने महिलाओं के आभूषण, पहाड़ की कला, संस्कृति और यहां की धरोहर सहित विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए हैं जो अपने आप में अनोखे हैं इन उत्पादों को बेचकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। रेशम विभाग के उपनिदेशक हेमचंद्र ने बताया कि आने वाले दिनों में लोगो व ब्रांड नाम को ट्रेडमार्क के रूप में विकसीत किया जायेगा। विभाग का उद्देश्य है कि महिला समूहों को वृहद उद्यम के रूप में स्थापित किया जाए आपको बता दें कि अभी तक रेशम से राज्य में धागाकरण कर वस्त्र उत्पादन का कार्य तो किया जा रहा था लेकिन पहली बार अब रेशम कोये से हस्तशिल्प के माध्यम से मनमोहक, सजावटी व उपयोगी सामान तैयार किये गए हैं जो निश्चित तौर पर भविष्य में अपनी खास पहचान बनाने को तैयार है।

