उत्तराखंड फिल्मी पटकथा जैसा ऑपरेशन दूल्हा-दुल्हन की शादी का बहाना, पहुंचे अधिकारी, 35 घंटे बाद खुला करोड़ों की टैक्स चोरी का राज

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी 

उत्तराखंड फिल्मी पटकथा जैसा ऑपरेशन! दूल्हा-दुल्हन की शादी का बहाना, पहुंचे अधिकारी, 35 घंटे बाद खुला करोड़ों की टैक्स चोरी का राज

रामनगर। डेस्टिनेशन वेडिंग के नाम पर कथित जीएसटी चोरी करने वाले रिसॉर्ट संचालकों के खिलाफ राज्य कर विभाग ने ऐसा गोपनीय ऑपरेशन चलाया, जिसकी पूरी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। शादी की बुकिंग, दूल्हा-दुल्हन के परिजनों का बहाना और मेहमान बनकर रिसॉर्ट में दाखिल हुए अधिकारी… लेकिन रिसॉर्ट संचालकों को भनक तक नहीं लगी कि जिन लोगों को वह शादी के मेहमान समझ रहे हैं, वे वास्तव में राज्य कर विभाग की एसआईबी टीम के सदस्य हैं। करीब 35 घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद करोड़ों रुपये की कथित टैक्स चोरी का मामला सामने आया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आयुक्त कर प्रतीक जैन के निर्देश एवं अपर आयुक्त कुमाऊं राकेश शर्मा के मार्गदर्शन में राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने रामनगर के छोई और ढेला क्षेत्र स्थित दो प्रतिष्ठित रिसॉर्ट्स पर छापेमारी की। इस कार्रवाई से रिसॉर्ट कारोबारियों में हड़कंप मच गया।

शादी की बुकिंग के बहाने तैयार की गई पूरी पटकथा

दरअसल, राज्य कर विभाग की हल्द्वानी स्थित एसआईबी को पिछले कई महीनों से इन रिसॉर्ट्स की व्यावसायिक गतिविधियों, विवाह समारोहों की बुकिंग और भुगतान के तरीकों को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि रिसॉर्ट संचालक भव्य विवाह आयोजनों से होने वाली वास्तविक आय छिपाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं मामले की तह तक पहुंचने के लिए विभाग ने फरवरी 2027 में प्रस्तावित एक विवाह समारोह की बुकिंग के नाम पर छद्म पहचान के साथ रिसॉर्ट प्रबंधन से संपर्क किया। टीम की एक महिला सदस्य ने वर-वधू पक्ष के परिजन की भूमिका निभाई और विवाह आयोजन की व्यवस्थाओं, पैकेज तथा भुगतान को लेकर रिसॉर्ट प्रबंधन से बातचीत की। कई दौर की बातचीत के बाद जब अधिकारियों को कथित कर चोरी के संकेत मिले तो छापेमारी की पूरी रणनीति तैयार कर ली गई।

मेहमान समझकर करते रहे बातचीत, अचानक सामने आ गई एसआईबी

निर्धारित योजना के तहत अधिकारी छद्म मेहमान बनकर रिसॉर्ट परिसर में दाखिल हुए। विवाह आयोजन को अंतिम रूप देने के नाम पर बातचीत की गई। जैसे ही अधिकारियों को आवश्यक जानकारी और साक्ष्य मिलने का भरोसा हुआ, उन्होंने अपना वास्तविक परिचय उजागर कर दिया। अचानक सामने आए राज्य कर विभाग के अधिकारियों को देखकर रिसॉर्ट संचालक सकते में आ गए। इसके बाद शुरू हुई दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच।

35 घंटे तक चला ऑपरेशन, 25 लाख रुपये तत्काल जमा 

जांच के दौरान अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में कारोबारी दस्तावेज, भौतिक अभिलेख और डिजिटल उपकरण फॉरेंसिक विशेषज्ञों की देखरेख में कब्जे में लिए। करीब 35 घंटे तक चली इस गोपनीय कार्रवाई में विवाह आयोजनों से संबंधित बुकिंग और भुगतान के रिकॉर्ड खंगाले गए। कार्रवाई के दौरान एक रिसॉर्ट संचालक ने मौके पर ही डीआरसी-03 के माध्यम से 25 लाख रुपये राजकोष में जमा कराए।

केटरिंग से लेकर डेकोरेशन तक जांच के घेरे में

उपायुक्त ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ रिसॉर्ट संचालक डेस्टिनेशन वेडिंग के दौरान केटरिंग, डेकोरेशन सहित विभिन्न सेवाओं को अपनी मुख्य आपूर्ति में शामिल नहीं कर रहे हैं। जबकि नियमानुसार ऐसी सेवाओं पर लागू जीएसटी का निर्धारण किया जाना आवश्यक है। विभाग अब इन सेवाओं से जुड़े वास्तविक कारोबार और भुगतान की पड़ताल कर रहा है।उन्होंने स्पष्ट किया कि रामनगर, नैनीताल और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों में संचालित रिसॉर्ट्स की गतिविधियों पर विभाग की पैनी नजर है। आने वाले दिनों में अन्य संदिग्ध कारोबारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है छापेमारी दल में सहायक आयुक्त अनिल सिन्हा, डॉ. हरिओम वर्मा, शिवपाल सिंह, देवेश, आयुषी, तनुजा, आकाश, एजाज बेग, आकांक्षा, शशांक और भावना सहित राज्य कर विभाग के कई अधिकारी शामिल रहे।

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