दीपक अधिकारी
हल्द्वानी , देहरादून
21 दिनों में 45,453 आउटगोइंग कॉल किए जाने का खुलासा, SIP कनेक्शन से अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग गेटवे को बाईपास करने के मिले सबूत; मुरादाबाद निवासी मुख्य आरोपी गिरफ्तार
देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की कुमाऊं यूनिट ने अवैध टेलीकॉम सेटअप और डिजिटल एक्सचेंज के एक मामले का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान सामने आया कि NS Enterprise के नाम से टेलीकॉम सेटअप संचालित किया जा रहा था। इस सेटअप के माध्यम से महज 21 दिनों में 45 हजार 453 आउटगोइंग कॉल किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में STF ने मुरादाबाद निवासी मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है STF के आईजी नीलेश आनंद भरणे ने कार्रवाई का खुलासा करते हुए बताया कि जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे SIP कनेक्शन के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग गेटवे को बाईपास करने और ऑटोमेटेड रोबो कॉलिंग संचालित किए जाने की आशंका सामने आई है। टीम अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिका की जांच में जुटी है।
21 दिनों में 45,453 आउटगोइंग कॉल
जांच में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, संबंधित टेलीकॉम सेटअप से 21 दिनों के भीतर 45,453 आउटगोइंग कॉल की गईं। इतनी बड़ी संख्या में कॉल किए जाने से जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली और इसके संभावित इस्तेमाल को लेकर अहम सुराग मिले हैं। STF अब कॉलिंग सिस्टम, कनेक्शन और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
SIP कनेक्शन से गेटवे बाईपास करने के मिले साक्ष्य
प्रारंभिक जांच में SIP कनेक्शन का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग गेटवे को बाईपास करने के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। SIP यानी Session Initiation Protocol इंटरनेट आधारित संचार में वॉयस कॉल स्थापित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक है। इसका वैध इस्तेमाल इंटरनेट टेलीफोनी में किया जाता है, लेकिन यदि इसका उपयोग अधिकृत टेलीकॉम व्यवस्था को दरकिनार करने के लिए किया जाए तो यह जांच का गंभीर विषय बन सकता है इसके अलावा, सेटअप से ऑटोमेटेड रोबो कॉलिंग के संकेत भी मिले हैं। ऐसी कॉलिंग में सॉफ्टवेयर या कंप्यूटर आधारित प्रणाली की मदद से बड़ी संख्या में कॉल की जा सकती हैं। हालांकि, इस नेटवर्क के वास्तविक उद्देश्य और इसके जरिए की गई कॉल की प्रकृति की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
कंप्यूटर, राउटर, मोबाइल और नेटवर्किंग उपकरण बरामद
STF की टीम ने मौके से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और नेटवर्किंग उपकरण बरामद किए हैं। इनमें कंप्यूटर, जियो और एयरटेल के राउटर, कई मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और अन्य नेटवर्किंग उपकरण शामिल हैं जांच के दौरान कंप्यूटर से कॉलिंग सिस्टम संचालित करने और उसे नियंत्रित किए जाने से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिलने की जानकारी भी सामने आई है। बरामद उपकरणों और डिजिटल डेटा की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कॉलिंग सिस्टम किस तरह काम करता था, कितने कनेक्शन इस्तेमाल किए जा रहे थे और इसके संचालन में किन लोगों की भूमिका थी।
मुरादाबाद निवासी मुख्य आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में STF ने मुरादाबाद निवासी मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। एजेंसी अब आरोपी से पूछताछ और बरामद डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर नेटवर्क की पूरी कार्यप्रणाली का पता लगाने में जुटी है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इस सेटअप को स्थापित करने, संचालित करने और कॉलिंग व्यवस्था को नियंत्रित करने में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।
नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी
STF की टीम इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। जांच का मुख्य फोकस कॉलिंग सिस्टम के संचालन, SIP कनेक्शन के इस्तेमाल, डिजिटल उपकरणों से मिले साक्ष्यों और 21 दिनों में की गई 45,453 आउटगोइंग कॉल के रिकॉर्ड पर है।फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही अवैध टेलीकॉम सेटअप के पूरे नेटवर्क, उसकी गतिविधियों और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी।





