हल्द्वानी में खूनी टेरिटोरियल फाइट: जंगल में दो बाघों की आपस में भिड़ंत, दोनों की मौत; उत्तराखंड में पहली बार दिखा ऐसा भीषण नजारा

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दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

हल्द्वानी वन प्रभाग के छकाता रेंज के सिमलिया क्षेत्र में दो नर बाघों के संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। दोनों बाघों के शव छकाता रेंज से लगे गुमाल गांव के पास जंगल में करीब 1 किलोमीटर अंदर मिला है। दोनों बाघों का शव महज 20 मीटर की दूरी पर मिले। इस दुर्लभ और भयानक घटना से जहां एक तरफ वन कर्मियों के होश उड़े हुए हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

रातभर गूंजती रही दहाड़, सुबह 20 मीटर की दूरी पर मिले शव

गुमाल गांव के ग्रामीणों ने बताया कि शनिवार रात जंगल में बाघों के भीषण दहाड़ने और लड़ने की आवाजें आ रही थीं। काफी देर तक चीख-पुकार मचने के बाद देर रात अचानक आवाजें बंद हो गईं। रविवार जब ग्रामीण जंगल के करीब पहुंचे, तो दोनों बाघों के शव बेसुध पड़े देखे।

ग्रामीणों की सूचना पर वन क्षेत्राधिकारी (RO) मनीष कुमार, आला अधिकारी और डॉक्टरों की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वन कर्मियों ने देखा कि दोनों बाघ मृत पड़े थे और आसपास भारी मात्रा में खून फैला हुआ था।

वन विभाग की शुरुआती जांच में घटना स्थल पर पंजों और घसीटे जाने के गहरे निशान मिले हैं,जो भीषण लड़ाई की गवाही दे रहे हैं। एक नर बाघ की उम्र 3 से 4 साल और दूसरे की 4 से 5 साल के बीच है। लड़ाई में एक बाघ के गर्दन की मुख्य नस और दूसरे के बाएं पैर की जांघ की नस बुरी तरह क्षतिग्रस्त पाई गई है। एक बाघ की गर्दन पर तो दूसरे की कमर पर गहरे घाव हैं।डॉक्टरों के अनुसार दोनों बाघों के सभी अंग, पंजे और नाखून पूरी तरह सुरक्षित हैं। इससे अवैध शिकार की आशंका खारिज होती है।

डीएनए सैंपल लैब भेजे, वीडियोग्राफी के साथ हुआ पोस्टमार्टम

मौके की नजाकत को देखते हुए डीएफओ कुंदन कुमार मौके पर पहुंचे और वन विभाग की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य और नमूने एकत्र किए। डॉक्टरों की टीम ने पूरी पारदर्शिता के साथ पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई। सटीक कारणों का पता लगाने के लिए डीएनए (DNA) सैंपल भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

पहाड़ों तक बढ़ा बाघों का कुनबा

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में मैदान से लेकर पहाड़ों तक बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हाल के वर्षों में नौकुचियाताल, सातताल, भीमताल, ओखलकांडा और धारी क्षेत्र के जंगलों में बाघों की सक्रियता बढ़ी है। दायरा सीमित होने और बाघों की संख्या बढ़ने के कारण इलाके पर कब्जे (Territory) को लेकर इस तरह के जानलेवा संघर्ष बढ़ रहे हैं डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि प्रथमदृष्टया दोनों नर बाघों की मौत आपसी संघर्ष (Territorial Fight) के कारण ही हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच आने के बाद ही मौत के असल और सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।

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