पुराने शासकीय वाहन में सजी उत्तराखण्ड की लोक-संस्कृति, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की अभिनव पहल 

Spread the love

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा अपनी रचनात्मक और सांस्कृतिक सोच का परिचय देते हुए एक पुराने शासकीय वाहन को उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक-संस्कृति के रंगों और प्रतीकों से सुसज्जित किया गया। इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालय ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि अनुपयोगी मानी जाने वाली वस्तुएँ भी रचनात्मक दृष्टिकोण से उपयोगी और आकर्षक बनाई जा सकती हैं इस विशेष रूप से सुसज्जित वाहन का लोकार्पण मुख्य अतिथि, नगर-निगम हल्द्वानी के महापौर गजराज सिंह बिष्ट द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायी है, क्योंकि यह दर्शाती है कि पुरानी वस्तुएँ भी हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों में यह संदेश जाएगा कि जो वस्तु हमें निष्प्रयोज्य लगती है, उसे भी नवाचार और सृजनात्मक सोच के माध्यम से पुनः उपयोग में लाया जा सकता है साथ ही यह प्रयास उत्तराखण्ड की लोक-संस्कृति के संरक्षण की दिशा में भी एक सराहनीय कदम है कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहल स्मृति और संस्कृति—दोनों को संरक्षित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह रचनात्मक प्रयोग इस बात का उदाहरण है कि प्रयोजनहीन समझी जाने वाली वस्तुओं को भी नवाचारी विचारों से नया और आकर्षक स्वरूप दिया जा सकता है लोकार्पण कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव खेमराज भट्ट द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक, समस्त विद्याशाखाओं के निदेशक, शिक्षक, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय में यह जिम्मेदारी गृह विभाग को सौम्पी गई थी विश्वविद्यालय की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण और पुनः उपयोग की भावना को प्रोत्साहित करती है, बल्कि उत्तराखण्ड की लोक-संस्कृति को आमजन और युवाओं तक पहुँचाने का भी एक प्रभावी माध्यम बनकर सामने आई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *