दीपक अधिकारी
हल्द्वानी
गांधी आश्रम फतेहपुर क्षेत्र में एक महिला की बाघ के हमले में हुई दर्दनाक मृत्यु अत्यंत दुःखद और हृदयविदारक है। यह घटना न केवल एक परिवार की अपूरणीय क्षति है, बल्कि वन विभाग की घोर असफलता और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को भी उजागर करती है गंभीर तथ्य यह है कि पूर्व में भी इसी वन क्षेत्र में बाघ/गुलदार के हमलों में सात लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद वन विभाग ने कोई ठोस, प्रभावी और स्थायी कदम नहीं उठाया। लगातार हो रही ऐसी घटनाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि विभाग ने पूर्व की त्रासदियों से कोई सबक नहीं लिया और ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी।वन्यजीवों की गतिविधियों की लगातार मिल रही सूचनाओं के बावजूद प्रभावी गश्त, निगरानी और सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित नहीं किए गए। यदि समय रहते ठोस एवं गंभीर कार्रवाई की गई होती, तो संभवतः आज एक और परिवार उजड़ने से बच सकता था।

