बेतालघाट मे होगा भव्य विधानसभा सभा सम्मेलन :: सिलू कुमार

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

कुलदीप रौतेला

आगामी 2027 के चुनावी रण की आहट तेज हो चुकी है। राजनीतिक दल अपनी रणनीतियाँ बनाने में जुटे हैं, लेकिन इस बार निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बनाने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं हर चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार अपनी अलग पहचान और स्थानीय मुद्दों के दम पर मैदान में उतरते हैं। कई बार ये प्रत्याशी बड़े दलों के समीकरण बिगाड़ देते हैं और परिणामों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं 2027 के चुनाव को लेकर भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कई सामाजिक कार्यकर्ता, क्षेत्रीय प्रभाव रखने वाले नेता और असंतुष्ट राजनीतिक चेहरे निर्दलीय रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।अगर बात करें नैनीताल विधानसभा सीट की, तो यह क्षेत्र राजनीतिक दृष्टि से हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्यटन, स्थानीय विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएँ यहाँ के प्रमुख चुनावी मुद्दे रहे इनका फोकस आमतौर पर स्थानीय समस्याएँ जैसे सड़क, पानी, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज्यादा रहता है, जिससे जनता के एक वर्ग का समर्थन इन्हें मिलता रहा है।  इस बार नैनीताल विधानसभा मे शीलू कुमार का नाम भी लोगो की जुबान पर चर्चा का विषय बना हुआ हैं, ये लगातार क्षेत्र मे एक सामाजिक कार्यकर्त्ता के रूप मे लोगो के बीच अपनी जगह बनाते हुए आये हैं, और एक बड़ा जनाधार इनके समर्थन मे माना जा रहा हैं हल्द्वानी मे आयोजित एक प्रेस के दौरान सिलू कुमार ने बताया की जनता अब परिवार वाद, मेरे बाद मेरा राजकुमार की ओछी राजनीत से उब चुकी हैं, अब समय आ गया हैं की आगामी चुनावों के नतीजे युवाओं के पक्ष मे होंगे और निर्दलीय रूप मे आगामी चुनावी रण मे वो शिरकत करेंगे और युवाओं वर्ग की आवाज बनेंगे शीलू कुमार ने बताया कि वह भी इस बार नैनीताल विधानसभा से चुनाव लड़कर युवाओं की आवाज बनेंगे, हल्द्वानी मे एक प्रेस के दौरान सीलू कुमार ने बताया कि 16 फरवरी को बेतालघाट में एक विशाल विधानसभा सम्मेलन होने जा रहा है जिसको लेकर तैयारियां चल रही हैं जिसमे क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जानी हैं फिलहाल अभी चुनाव दूर पर हलचल तेज है और आने वाले समय में राजनीतिक तस्वीर और भी साफ होने की उम्मीद है। हलाकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि निर्दलीय उम्मीदवार मजबूत जनाधार के साथ उतरते हैं, तो वे न केवल वोट कटवा साबित हो सकते हैं, बल्कि कुछ सीटों पर जीत हासिल कर सत्ता के समीकरण भी बदल सकते हैं।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement