बुढ़ापे के सहारे ने ही छोड़ा बेसहारा, जिलाधिकारी ने दिए जांच के निर्देश

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

कालाढूंगी। बेटे के पैदा होने पर लोग जश्न मनाते हैं। मां बाप अपनी अपनी ख्वाहिशों का गला घोट कर बच्चों के लिए हर जरूरत पूरी करने का प्रयास करते हैं। इस आस में की जब हम बूढ़े हो जाएंगे तो यही औलाद हमारा सहारा बनेगी, लेकिन जब वही बेटा बुढ़ापे में उन्हें सड़क पर ला खड़ा कर दर – दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर दे तो क्या हो।मंगलवार को कालाढूंगी में लगे जनता दरबार में डीएम ललित मोहन रयाल के समक्ष ऐसा ही एक मामला आया। डीएम के समाज अपनी आप बीती बताने के दौरान बैलपड़ाव निवासी कुसुम देवी और मोहन राम की आँखें भर आईं बुजुर्ग दंपती ने बताया कि करीब 14 वर्ष पहले आर्मी से सेवानिवृत्त बेटे ने उन्हें भरोसे में लेकर नहर किनारे स्थित उनकी जमीन और घर बिकवा दिया। खुद भी अपना हिस्सा बेच दिया। इसके बाद वह उन्हें बेसहारा छोड़कर अपने परिवार सहित हल्द्वानी दमुवाढूंंगा में ही रहने लगा जबकि वे दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। जिस घर में उन्होंने अपना जीवन गुजरा अपने बच्चों को बड़ा होते देखाआज वही घर उनके लिए पराया हो गया उन्होंने बताया कि वह 80 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं और अब उनके पास ल न तो सिर छुपाने के लिए ठिकाना है और ना ही सहारा देने वाला कोई अपना। गांव वालों की दया से किसी तरह उनका गुजारा हो रहा है। माता-पिता की पीड़ा सुनकर वहां मौजूद लोग भावुक हो उठे बुजुर्ग दंपति की शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने एसडीएम कालाढूंगी को निर्देश दिए हैं कि बुजुर्ग दंपती को उनका हक दिलाने के लिए शीघ्र कार्रवाई की जाए। जिस बेटे की शिकायत लेकर माता-पिता पहुंचे हैं, उसका नंबर लेकर मामले में बुजुर्ग दंपती को न्याय दिलाया जाए।

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