खटीमा नगरपालिका में टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल—अपनों को फायदा या जनता से पर्दा

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

खटीमा ऊधम सिंह नगर उत्तराखंड

खटीमा नगर पालिका एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मामला 26 नवंबर 2025 को हुए स्लॉटर हाउस पर आरोप लग रहे हैं कि नगर पालिका प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को ताक पर रखकर ‘पर्दादारी’ का खेल खेला है। आखिर क्यों टेंडर की सूचना उन बड़े अखबारों से गायब रही जिन्हें जनता रोज़ पढ़ती है जब खटीमा नगर पालिका में कोई छोटा सा कार्यक्रम भी होता है, तो उसकी खबर अमर उजाला, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, पंजाब केसरी , उत्तर उजाला, अमृत विचार,और, दैनिक भास्कर, जैसे बड़े अखबारों में प्रमुखता से छपती है। लेकिन जब बात करोड़ों के स्लॉटर हाउस टेंडर की आई, तो प्रशासन ने इन लोकप्रिय अखबारों से दूरी बना ली।आरोप है कि टेंडर का विज्ञापन केवल शाह टाइम्स, उत्तर केसरी और जन एक्सप्रेस जैसे गिने-चुने अखबारों में ही प्रकाशित किया गया। सवाल यह है कि क्या यह जान बूझकर किया गया ताकि आम जनता और स्थानीय ठेकेदारों को इसकी भनक न लगे? खटीमा के बेरोजगार युवाओं और स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष है कि टेंडर की सूचना स्थानीय स्तर पर प्रसारित नहीं की गई और बड़े अखबारों को दरकिनार कर केवल सीमित प्रसार वाले अखबारों का चयन किया गया तथा स्थानीय युवाओं को मौका देने के बजाय उत्तराखंड से बाहर के व्यक्तियों को टेंडर आवंटित कर दिया गया स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया केवल चहेतों को फायदा पहुँचाने के लिए रची गई एक साजिश है। यदि टेंडर की सूचना अमृत विचार या उत्तर उजाला जैसे स्थानीय लोकप्रिय अखबारों में होती, तो खटीमा के कई बेरोजगार युवा भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते। बाहरी लोगों को प्राथमिकता देना और सूचना को गोपनीय रखना नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है। इस दौरान अधिशासी अधिकारी नगर पालिका खटीमा के प्रियंका सिंह का कहना है कि मानकों को पूरा कर उत्तराखंड के बाहरी यूपी के छह लोग टेंडर में प्रतिभाग कर रहे है अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इन आरोपों पर कोई सफाई देता है या इस ‘टेंडर के खेल’ की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी। खटीमा की जनता जवाब मांग रही है।

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