वंदे मातरम् के सम्मान से समझौता देश की भावनाओं का अपमान: मनोज पाठक

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

हल्द्वानी। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के अवसर पर कांग्रेस द्वारा अपने कार्यक्रमों में इसके केवल प्रथम दो छंद के गायन तक सीमित रहने के निर्णय पर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मनोज पाठक ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रभक्ति, त्याग और राष्ट्रीय चेतना की अमिट पहचान है। इसके गौरव और ऐतिहासिक विरासत को राजनीतिक सुविधा के तराजू पर तौलना करोड़ों देशवासियों की भावनाओं का अपमान है मनोज पाठक ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के कठिन दौर में ‘वंदे मातरम्’ ने देशवासियों के भीतर स्वाधीनता की लौ- प्रज्वलित करने और राष्ट्रभावना को मजबूत करने का ऐतिहासिक कार्य किया। असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के लिए यह केवल शब्द नहीं, बल्कि संघर्ष और संकल्प का उद्घोष था। ऐसे राष्ट्रगीत की गरिमा और स्वरूप को राजनीतिक निर्णयों से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है उन्होंने कहा, “‘वंदे मातरम्’ किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। यह भारत की मिट्टी, उसकी चेतना और उसके गौरव की आवाज है। जिस राष्ट्रगीत ने स्वतंत्रता आंदोलन में जन-जन को एकजुट किया, उसके सम्मान को राजनीतिक सुविधा और वोट-बैंक की राजनीति से जोड़ना देश की भावनाओं के साथ अन्याय है।”मनोज पाठक ने कहा कि देश आज ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का गौरव मना रहा है। इसी अवसर पर 22 अगस्त को भाजपा की राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में राष्ट्रगीत की गौरवशाली विरासत के सम्मान, संरक्षण और जन-जन तक उसके ऐतिहासिक महत्व को पहुंचाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक यात्रा, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका और उसके राष्ट्रीय महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान में भी यदि राजनीति का चश्मा लगाया जाएगा, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। देश बदल चुका है, देश की सोच बदल चुकी है, लेकिन कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति आज भी उसी पुराने ढर्रे पर चल रही है। राष्ट्रगीत के मामले में भी राजनीतिक लाभ-हानि का हिसाब लगाना उसकी इसी मानसिकता को दर्शाता है।”मनोज पाठक ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीक और राष्ट्रगीत किसी दल, जाति, धर्म या विचारधारा की सीमाओं में बंधे हुए नहीं हैं। ये पूरे भारत की साझा विरासत हैं और प्रत्येक भारतीय के गौरव से जुड़े हैं। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व, उसकी गरिमा और देशवासियों की भावनाओं का सम्मान करे। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ की गौरवगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना केवल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय का राष्ट्रीय दायित्व है। राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे त्याग, संघर्ष, स्वतंत्रता और राष्ट्रभावना को समझने में है। मनोज पाठक ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ पर राजनीति नहीं, राष्ट्रभावना सर्वोपरि होनी चाहिए। भारत की राष्ट्रीय चेतना के इस अमर उद्घोष की गरिमा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement