दीपक अधिकारी
हल्द्वानी
कुमाऊं के सबसे बड़े मोतीराम बाबूराम राजकीय स्नातकोत्तर (एमबीपीजी) कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव का पारा पूरी तरह गरमा गया है। 29 सितंबर को छात्र संघ चुनाव होने हैं। कॉलेज के अध्यक्ष पद के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। चुनाव की तारीख नजदीक आते ही सभी प्रत्याशी और छात्र संगठन कैंपस में अपनी पूरी ताकत झोंकने में जुटे हुए हैं।
बगावत और समीकरण: बागी आर्यन बेलवाल को मिला बड़ा समर्थन
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से टिकट कटने के बाद बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे आर्यन बेलवाल को बड़ा सियासी समर्थन मिला है। पिछले वर्ष NSUI के टिकट पर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके पूर्व छात्र नेता कमल बोरा ने खुलकर आर्यन बेलवाल को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है कमल बोरा के इस कदम से कैंपस की छात्र राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। छात्र राजनीति के जानकार इसे NSUI के भीतर जारी अंदरूनी गुटबाजी से जोड़कर भी देख रहे हैं।
ABVP के पूर्व पदाधिकारियों का मिला साथ
आर्यन बेलवाल को केवल विरोधी खेमे से ही नहीं, बल्कि अपने पूर्व संगठन से भी मजबूत समर्थन मिल रहा है। ABVP द्वारा धीरज बिष्ट को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित करने के बाद से ही संगठन में असंतोष की लहर थी। टिकट वितरण से नाराज ABVP के कई पूर्व पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। अब ये पूर्व पदाधिकारी और निष्ठावान कार्यकर्ता मैदान में खुलकर आर्यन बेलवाल के पक्ष में चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय फंसा पेंच
एमबीपीजी कॉलेज में इस बार मुख्य मुकाबला तीन बड़े चेहरों के बीच सिमट गया है:धीरज बिष्ट — अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के आधिकारिक प्रत्याशी
मेहुल शाह — नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के अधिकृत उम्मीदवार
आर्यन बेलवाल — ABVP के पूर्व कार्यकर्ता व निर्दलीय उम्मीदवार
दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के बीच निर्दलीय आर्यन बेलवाल की मजबूत दावेदारी और उन्हें लगातार मिल रहे सियासी समर्थन ने पूरे चुनाव के समीकरण बदल दिए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि एबीवीपी, एनएसयूआई और निर्दलीय खेमे की इस जोर-जमाइश के बीच एमबीपीजी कॉलेज के आम छात्र-छात्राएं किसके सिर जीत का सेहरा सजाते हैं।




