SIR में कथित फर्जी आपत्तियों को लेकर तहसील में गरजे उवैस राजा, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

हल्द्वानी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम पर कथित फर्जी आपत्तियां दर्ज किए जाने और प्रभावित मतदाताओं को समय पर नोटिस उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाते हुए समाजसेवी उवैस राजा ने गुरुवार को तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार हल्द्वानी को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, प्रभावित मतदाताओं को तत्काल नोटिस उपलब्ध कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की उवैस राजा ने ज्ञापन में कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान क्षेत्र के अनेक मतदाताओं के नाम पर अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से फर्जी आपत्तियां दर्ज कराए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि मामला सीधे तौर पर मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा है, इसलिए इसकी गंभीरता से जांच किया जाना जरूरी है उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं, उनमें से कई लोगों को अभी तक संबंधित आपत्तियों की विधिवत जानकारी अथवा नोटिस उपलब्ध नहीं कराया गया है इसके चलते मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने, आपत्तियों का जवाब देने और अपने पक्ष में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि SIR के दौरान दर्ज सभी संदिग्ध आपत्तियों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए और जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्तियां दर्ज हैं, उन्हें तत्काल विधिवत नोटिस उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रत्येक मतदाता को अपना पक्ष रखने, आपत्ति का जवाब देने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का उचित अवसर दिए जाने की मांग की गई। उवैस राजा ने कहा कि यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर गलत या फर्जी आपत्ति दर्ज कराई है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि किसी भी मतदाता को उचित सूचना और सुनवाई का अवसर दिए बिना उसके नाम को प्रभावित न किया जाए तथा पूरी SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन प्रभावी निगरानी एवं जांच व्यवस्था लागू करे। धरना-प्रदर्शन के दौरान उवैस राजा ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और किसी वास्तविक मतदाता का अधिकार किसी भी स्तर पर प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की, ताकि SIR की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके और किसी भी पात्र मतदाता के अधिकारों पर असर न पड़े।

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