दीपक अधिकारी
हल्द्वानी
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करते हुए जेलों के भीतर टीबी की पहचान और रोकथाम के लिए एक नई पहल की शुरुआत की गई है। उप कारागार हल्द्वानी में हैंडहेल्ड डिजिटल चेस्ट एक्स-रे के माध्यम से कैदियों की टीबी जांच कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ, जिससे अब बंदीगृहों में भी आधुनिक तकनीक के जरिए त्वरित और सटीक जांच संभव हो सकेगी। इस कार्यक्रम का संचालन जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से किया जा रहा है, जिसमें जिला क्षय रोग विभाग, उत्तराखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति और अन्य सहयोगी संस्थाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम में जेल अधीक्षक प्रमोद कुमार, जेलर अमित कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश ढकरियाल सहित कई अधिकारियों और विशेषज्ञों की उपस्थिति रही, जिन्होंने इस पहल को टीबी उन्मूलन की दिशा में अहम कदम बताया। ग्लोबल फंड के GC-7 प्रोग्राम के तहत शुरू किए गए इस अभियान में अत्याधुनिक हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे मशीनों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है, जिससे टीबी के संदिग्ध मामलों की तेजी से पहचान हो सकेगी।इस तकनीक के माध्यम से कैदियों की जांच न केवल तेज होगी बल्कि इलाज से जोड़ने की प्रक्रिया भी समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी। कार्यक्रम के सफल संचालन में India HIV/AIDS Alliance, AKROSS HealthTek और Sharda Imaging जैसी संस्थाओं का विशेष सहयोग रहा। विशेषज्ञों ने सुरक्षित संचालन, रेडिएशन सुरक्षा और मरीजों को तत्काल उपचार से जोड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई। अधिकारियों के अनुसार, जेल जैसे बंद स्थानों में टीबी की रोकथाम एक बड़ी चुनौती होती है, ऐसे में यह पहल संक्रमण को नियंत्रित करने में कारगर साबित होगी।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार टीबी मुक्त उत्तराखंड के लक्ष्य को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है। यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा, जिससे न केवल कैदियों बल्कि समाज के व्यापक वर्ग को भी लाभ मिलेगा।


