बनभूलपुरा हिंसा मामला : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब ने किया सरेंडर

दीपक अधिकारी

हल्द्वानी

हल्द्वानी के चर्चित बनभूलपुरा हिंसा मामले में एक नया कानूनी मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मामले के दो मुख्य चेहरों को वापस जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। पेश है इस घटनाक्रम पर एक विस्तृत रिपोर्ट:

बनभूलपुरा केस: मुख्य आरोपियों ने किया सरेंडर, 14 दिन की न्यायिक हिरासत

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर

बनभूलपुरा कांड के मुख्य आरोपी जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब ने मंगलवार को हल्द्वानी की एडीजे प्रथम (ADJ-1) अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

क्यों रद्द हुई जमानत?

इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को ‘डिफॉल्ट बेल’ दे दी थी, जिसे उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सरकार का तर्क: राज्य सरकार ने दलील दी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है।

शीर्ष अदालत का फैसला: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए आरोपियों को दो हफ्ते के भीतर ट्रायल कोर्ट में समर्पण करने का निर्देश दिया था। इसी समयसीमा के तहत यह सरेंडर हुआ है।

क्या था बनभूलपुरा कांड? (एक नजर में)

8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी का बनभूलपुरा इलाका हिंसा की आग में झुलस गया था। अतिक्रमण हटाने गई टीम पर उग्र भीड़ ने हमला बोल दिया था:

हमले का स्वरूप: पुलिस बल पर अंधाधुंध पथराव, फायरिंग और पेट्रोल बमों का इस्तेमाल।

पुलिस को निशाना: उपद्रवियों ने न केवल वाहनों को फूंका, बल्कि महिला पुलिसकर्मियों को थाने के भीतर बंद कर आग लगाने की कोशिश भी की थी।

कानूनी धाराएं: आरोपियों पर IPC के साथ-साथ कड़े UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) और शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज हैं।

मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक का स्टेटस

जहाँ एक ओर जावेद और अरशद वापस जेल पहुंचे हैं, वहीं मामले का कथित मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक फिलहाल बाहर है। मलिक को 16 अप्रैल को जमानत मिली थी। उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था और वह 782 दिनों तक जेल में रहा था।

निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख से साफ है कि हल्द्वानी हिंसा मामले में कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। अब सबकी नजरें आगामी ट्रायल और कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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